KK Pathak News: केके पाठक साहब स्कूलों में सप्लाई हो रही भ्रष्टाचार की 'थाली', हेडमास्टर पर खास 'वेंडर' से खरीदारी करने का दबाव
Bihar Education Department: बिहार में जब से केके पाठक ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का पदभार संभाला है। उनका दावा है कि सब कुछ सही चल रहा है। उन्हें विश्वास है कि उनकी देख-रेख में सब कुछ सही चलेगा। लेकिन केके पाठक को उनके ही विभाग के अधिकारी चूना लगाने पर तुले हुए हैं। ताजा मामला स्कूलों में थाली की सप्लाई को लेकर उठे सवाल का है। थाली सप्लाई में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। इसमें विद्यालय अवर निरीक्षक और स्थानीय पदाधिकारी बड़ा खेल कर रहे हैं।
पटना: देखिए बच्चों को थाली खरीदकर देना है। इसके लिए हेडमास्टर को भुगतान करना है। हेडमास्टर पर शिक्षा विभाग के कार्यालय में बैठे चपरासी से लेकर विद्यालय अवर निरीक्षक तक दबाव बना रहे हैं। चेक लेने के बाद बिल दिया जा रहा है। थाली की खरीदारी वाला बिल ऐसा है। जहां कोई शिकायत होने पर आप संपर्क नहीं कर सकते हैं। बिल में सप्लायर का एड्रेस नहीं है। मोबाइल नंबर नहीं है। बस यूं ही एक एजेंसी का नाम प्रिंट कर हेडमास्टर को थमाया जा रहा है। ये दर्द है राजधानी पटना के एक हेडमास्टर का। नाम नहीं छापने की शर्त पर महेंद्रू अंचल के पांच स्कूलों के हेडमास्टरों ने बताया कि विद्यालय अवर निरीक्षक मैडम की ओर से एक खास वेंडर को चिन्हित किया गया है। उसी से थाली की खरीदारी कराई जा रही है। नहीं खरीदने पर तरह-तरह से हेड मास्टर को तंग किया जाता है। थाली मानक के हिसाब से अच्छी भी नहीं है। थाली की क्वालिटी काफी खराब है। पैसे पूरे लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं हेडमास्टर पर दबाव बनाया जा रहा है कि आप जल्द से जल्द भुगतान करें। उसके बदले में जो बिल थमाया जा रहा है। वो बिल किसी काम का नहीं है।
पटना में बड़ा घोटाला
आइए सबसे पहले समझ लेते हैं सरकार की ओर से थाली सप्लाई के मानक क्या तय किए गए हैं? उसके अलावा जान लेते हैं कि किस तरह की थाली सप्लाई की जा रही है। स्कूलों में थाली मुहैया कराने को लेकर सरकार की ओर से आदेश जारी हुआ। नियमानुसार 1 से 5वीं तक के कक्षा के बच्चों के लिए थाली की लंबाई और चौड़ाई का मानक 24 से 27 सेमी रखा गया है। हकीकत में स्कूलों में 23.5सेमी लंबाई और चौड़ाई वाली थाली सप्लाई की जा रही है। 6 से 8वीं तक के कक्षा के बच्चों के लिए थाली की लंबाई 27 से 30 सेमी रखी गई है। लेकिन मात्र 24 सेमी की थाली की सप्लाई की जा रही है। 1 से 5वीं तक के बच्चों के लिए थाली का मानक वजन 250 से 270 ग्राम निर्धारित किया गया है। सप्लाई मात्र 264 ग्राम और इससे भी हल्की और पतली थाली सप्लाई की जा रही है। 6 से 8वीं तक की कक्षा के लिए मानक वजन 300 ग्राम है। स्कूलों में कम वजन की थाली सप्लाई की जा रही है। थाली ऐसी है कि वो 15 दिन बाद ही फट जाएगी। स्टील की क्वालिटी काफी कमजोर है।

बिहार के हर जिले में खेल
बिहार के सीतामढ़ी जिले के एक हेडमास्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि विभागीय पत्र में थाली की खरीदारी विद्यालय शिक्षा समिति और हेडमास्टर की ओर से की जानी है। इसके लिए बाजार से कम से कम तीन विक्रेताओं से कोटेशन लेना है। उसके बाद न्यूनतम दर पर थाली की खरीदारी करना है। वहीं हकीकत में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और बीईओ की ओर से बताए गए वेंडर से आपूर्ति कराते हुए रिसीविंग के लिए दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही 200 से 140 रुपये प्रति थाली जबरन भुगतान कराया जा रहा है। जिस हेडमास्टर ने ऐसा करने से इनकार किया है। उसे शिक्षा विभाग का पूरा तंत्र मिलकर परेशान कर रहा है। हेडमास्टर कहते हैं कि क्या ये बातें केके पाठक को नहीं दिखती हैं। राजधानी पटना में उनकी नाम के नीचे महेंद्रू अंचल के 25 स्कूलों में विद्यालय अवर निरीक्षक मैडम की ओर से थाली खरीदारी में बड़ा खेल किया गया है। जांच होने पर इसका खुलासा हो जाएगा। उन्होंने अपने रिश्तेदार को सप्लायर बनाकर जबरन थाली की खरीदारी कराई है। जिससे शिक्षकों में काफी आक्रोश है। पटना ही नहीं बिहार के सीतामढ़ी, बक्सर और अन्य जिलों से इस प्रकार की खबरें आ रही हैं। जहां विद्यालय अवर निरीक्षक अपने खास वेंडर से थाली की सप्लाई करवा रहे हैं।
थाली खरीद में घोटाला
उन्होंने आगे एनबीटी ऑनलाइन को बताया कि थाली देने के क्रम में सिर्फ 1-5 और 6-8 में .... थाली रिसीव कराया गया। रिसीव कराने में अलग अलग स्मॉल और बिग प्लेट की चर्चा तक नहीं थी। सभी एक साइज के थाली थे। लेकिन भुगतान के लिए लगातार चेक पहुंचाने के दबाव पर हेडमास्टर ने चेक पहुंचाया तो उन्हें जो बिल थमाया गया उसमें स्मॉल और बिग प्लेट के अलग-अलग कीमत दर्ज है। जिस वेंडर का बिल दिया गया है उसमें उसका न तो पता है और न ही फोन नंबर। यानी कोई हेडमास्टर अपने आपूर्तिकर्ता से किसी तरह संपर्क भी नहीं कर सकता है। चूंकि महेन्द्रू अंचल विद्यालय अवर निरीक्षक के प्रभार में चल रहा है इसलिए वहां उनकी उपस्थिति नगण्य ही रहती है और इनका स्टाफ ही हेडमास्टर से डायरेक्ट संपर्क में रहता है। इससे पहले भी जब विकास फंड स्कूल को मिला था तो दीवार पेंटिंग और लेखन के लिए अपने वेंडर का दबाव बनाया गया था। लेकिन अधिकांश हेडमास्टर ने अपने-अपने वेंडर से काम करा लिया। इसलिए इस बार थाली पहले ही विद्यालय अवर निरीक्षक कार्यालय में मंगा कर बंटवा दिया गया और दबाव देकर भुगतान भी करवाया जा रहा है। शिक्षक ने बताया कि ये खुलेआम लूट की जा रही है। विद्यालय अवर निरीक्षक मैडम की ओर से सभी हेडमास्टरों की धमकी दी गई है। किसी ने मुंह खोला तो ठीक नहीं होगा। शिक्षक सवाल कर रहे हैं कि आखिर केके पाठक साहब ये क्या हो रहा है। आपके राज में खुलेआम लूट मची है। वहीं इस मामले पर पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने पर वेंडर सहित दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Source:नव भारत टाइम्स





