आखिर चैती छठ में कद्दू भात का क्यों है इतना महत्व? जानिए इसके धार्मिक कारण

कद्दू का छठ पर्व में महत्व बढ़ जाता है. इसको सब्जी नहीं बल्कि फल के रूप में देखा जाता है. इसको ऋतु फल के रूप में जाना जाता है.

आखिर चैती छठ में कद्दू भात का क्यों है इतना महत्व? जानिए इसके धार्मिक कारण
Chhath puja

चैती छठ आज से प्रारंभ है. यह बिहार का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है. इस लोक आस्था के महापर्व छठ में भगवान सूर्य के साथ उनकी बहन छठी मईया की पूजा की जाती है. आज से चैती छठ प्रारंभ हो गया है. व्रती गंगा स्नान कर घर में प्रसाद के रूप में कद्दू भात का भोजन बनाने में जुट गई है. इस दिन कद्दू भात का विशेष महत्व है. इस दिन सेंधा नमक में कद्दू के सब्जी को बनाकर और प्रसाद के रुप में ग्रहण किया जाता है.

क्यों कद्दू का बनता है प्रसाद

पंडित गुलशन झा ने बताया कि कद्दू का इस पर्व में महत्व बढ़ जाता है. इसको सब्जी नहीं बल्कि फल के रूप में देखा जाता है. इसे ऋतु फल के रूप में जाना जाता है, इसलिए कद्दू को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. इतना ही नहीं बल्कि यह शरीर के लिए भी लाभकारी होता है.

इसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन समेत कई तरह के चीज पाए जाते हैं जो शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इसके बाद 3 दिनों का चलने वाले निर्जला व्रत में भी व्रती को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है.

फलाहार के रूप में कद्दू का कर सकते हैं सेवन

वहीं पंडित ने बताया कि किसी भी पर्व में फलाहार के रूप में कद्दू का सेवन कर सकते हैं. इसका खीर, अनुना भुजिया समेत कई तरह के चीज को बना के खा सकते हैं. यह निर्जला रखने वाले व्रती के लिए लाभकारी होता है क्योंकि इसमें पानी की मात्रा भी अत्यधिक होती है. जो शरीर मे पानी की कमी नहीं होने देती है.