रणदीप सुरजेवाला केस में आज सुनवाई करेगा MP-MLA कोर्ट:24 साल पहले सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप, सुरजेवाला के वकील बोले-केस डायरी में उनका नाम नहीं
वाराणसी के MP-MLA कोर्ट में राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ 24 साल पुराने केस में सुनवाई होगी। NBW जारी होने के बाद आज कोर्ट ने सांसद को तलब किया है। सांसद लगातार कई तारीखों पर नहीं आए हैं। पिछली सुनवाई पर जज ने सुरजेवाला के वकील को हर हाल में पेशी कराने की चेतावनी भी दी थी। जिस पर सुरजेवाला के अधिवक्ता संजीव वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश का हवाला दिया था। जज ने मामले में सुनवाई के लिए 5 अप्रैल की तारीख तय किया था। संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज वाराणसी में 24 साल पहले बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसमें रणदीप सुरजेवाला ने प्रदर्शन कर चक्का जाम किया था। इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया गया था। मामले में हाईकोर्ट से प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुरजेवाला को राहत नहीं दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव गुप्ता ने मार्च में ही मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया था। रणदीप सुरजेवाला इस केस में बनाए गए थे आरोपी वाराणसी में 24 साल पहले जिला मुख्यालय पर चक्का जाम, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने को लेकर कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं को फर्जी ढंग से आरोपी बनाए जाने का आरोप लगाकर 21 अगस्त 2000 को युवा कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला और प्रदेश अध्यक्ष एसपी गोस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता आयुक्त कार्यालय परिसर में जबरन घुस गए थे। कांग्रेसी नेताओं ने आयुक्त कोर्ट में घुसकर हंगामा और तोड़फोड़ की थी। सूचना पर पुलिस सभी को शांत कराने गई तो प्रदर्शनकारी उलझ गए थे। पुलिस टीम ने बल प्रयोग किया तो कांग्रेसी कार्यकर्ता पथराव करते हुए भागने लगे। पुलिस ने मौके से रणदीप सिंह सुरजेवाला और एसपी गोस्वामी सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। केस दर्ज कर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था। सरकारी संपत्ति को हुआ नुकसान, वकील बोले- नाम नहीं सुरजेवाला के द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शन के दौरान उनके समर्थकों के द्वारा कथित तौर पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, पथराव किया गया और लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका गया। सुरजेवाला और अन्य के खिलाफ वाराणसी के कैंट थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। फिलहाल, इनके खिलाफ वाराणसी के MP-MLA कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। हालांकि सुरजेवाला की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहले ही खारिज हो चुकी है। वहीं सुरजेवाला के वकील का कहना है कि राज्यसभा सदस्य का नाम प्राथमिकी में नहीं है। गिरफ्तारी प्रपत्र और केस डायरी में भी उनका नाम नहीं है। इसके बावजूद उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। इसी आधार पर प्रार्थना पत्र देकर मामले से उन्मोचित (छोड़ने) किए जाने का अनुरोध कोर्ट से किया गया था। कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध ADGC विनय कुमार सिंह ने किया। हालांकि अभियोजन की मानें तो सुरजेवाला भी आरोपी हैं और उनकी पत्रावली की सुनवाई अलग चल रही है। उनकी ओर से अदालत में कई बार पत्रावली के स्पष्ट पठनीय कागजात उपलब्ध कराने के लिए अर्जी दी गई। कोर्ट की ओर से स्पष्ट पठनीय कागजात उपलब्ध भी कराया गया था। उसके बाद सुरजेवाला इलाहाबाद हाईकोर्ट गए तो उन्हें निर्देश मिला कि निचली अदालत में जाएं। निचली अदालत में सुरजेवाला ने डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था।
वाराणसी के MP-MLA कोर्ट में राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ 24 साल पुराने केस में सुनवाई होगी। NBW जारी होने के बाद आज कोर्ट ने सांसद को तलब किया है। सांसद लगातार कई तारीखों पर नहीं आए हैं।पिछली सुनवाई पर जज ने सुरजेवाला के वकील को हर हाल में पेशी कराने की चेतावनी भी दी थी। जिस पर सुरजेवाला के अधिवक्ता संजीव वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश का हवाला दिया था। जज ने मामले में सुनवाई के लिए 5 अप्रैल की तारीख तय किया था।
संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज
वाराणसी में 24 साल पहले बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसमें रणदीप सुरजेवाला ने प्रदर्शन कर चक्का जाम किया था। इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया गया था।मामले में हाईकोर्ट से प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुरजेवाला को राहत नहीं दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव गुप्ता ने मार्च में ही मामले को खारिज करने से इनकार कर दिया था।
रणदीप सुरजेवाला इस केस में बनाए गए थे आरोपी
वाराणसी में 24 साल पहले जिला मुख्यालय पर चक्का जाम, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने को लेकर कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें बहुचर्चित संवासिनी कांड में कांग्रेस नेताओं को फर्जी ढंग से आरोपी बनाए जाने का आरोप लगाकर 21 अगस्त 2000 को युवा कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला और प्रदेश अध्यक्ष एसपी गोस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता आयुक्त कार्यालय परिसर में जबरन घुस गए थे।
कांग्रेसी नेताओं ने आयुक्त कोर्ट में घुसकर हंगामा और तोड़फोड़ की थी। सूचना पर पुलिस सभी को शांत कराने गई तो प्रदर्शनकारी उलझ गए थे। पुलिस टीम ने बल प्रयोग किया तो कांग्रेसी कार्यकर्ता पथराव करते हुए भागने लगे। पुलिस ने मौके से रणदीप सिंह सुरजेवाला और एसपी गोस्वामी सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। केस दर्ज कर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था।
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