महायुद्ध या महाशांति? ट्रंप की आखिरी चेतावनी के बीच बंद हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ा संकट!
अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में बड़ा मोड़! डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को 50/50 बताते हुए नई स्ट्राइक की चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल का खतरा। पढ़ें लाइव अपडेट्स।
मिडिल ईस्ट संकट: ट्रंप की '50/50' चेतावनी और होर्मुज की नाकेबंदी से हड़कंप
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी जंग इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच अप्रैल में हुआ अस्थायी सीजफायर (युद्धविराम) अब टूटने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विस्फोटक बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ शांति समझौता होने की उम्मीद केवल "50/50" है। यदि रविवार तक ईरान ने अंतिम प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, तो अमेरिका उसे 'मटियामेट' (strike to kingdom come) करने के लिए नए सिरे से भीषण हमले शुरू कर देगा।
इस बीच, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर आंशिक नाकेबंदी जारी रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर खतरे की घंटी बज गई है।
1. ट्रंप का रुख और व्हाइट हाउस की हलचल
कूटनीतिक गलियारों में तनाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने वाशिंगटन में एक बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक के लिए अपने पारिवारिक कार्यक्रम तक को टाल दिया है।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में एक बयान के दौरान थोड़ी प्रगति की बात जरूर स्वीकारी है, लेकिन साथ ही आगाह किया है कि बहुत अधिक आशान्वित होने की जरूरत नहीं है।
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ट्रंप प्रशासन का मुख्य दबाव इस बात पर है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) का भंडार देश से बाहर भेजे, जिसे ईरान ने राष्ट्रीय संप्रभुता का हवाला देकर साफ इनकार कर दिया है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य का ब्लॉक होना और भारत पर इसका असर
दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और गैस इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरती है। सीजफायर के बावजूद यह मार्ग पूरी तरह नहीं खुला है, जिसके चलते:
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ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। माल ढुलाई का खर्च (Freight Costs) बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हो गई हैं।
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भारत में क्या होगा असर? भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। यदि होर्मुज संकट लंबा खिंचता है और अमेरिका ने दोबारा हमले शुरू किए, तो भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 8 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
3. पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता: क्या बचेगी शांति?
इस महायुद्ध को रोकने के लिए पर्दे के पीछे से बड़े स्तर पर कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं। पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और कतर का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस वक्त तेहरान (ईरान) में मौजूद हैं। इस्लामाबाद शांति वार्ता के तहत एक नया 14-सूत्रीय शांति ढांचा तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जिसके तहत सीजफायर को 60 दिनों के लिए और बढ़ाने का प्रस्ताव है।
हालांकि, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालबाफ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:
"अगर अमेरिका ने कोई भी बेवकूफी की और दोबारा युद्ध शुरू हुआ, तो ईरान का पलटवार पहले दिन से कहीं अधिक कड़वा और क्रशिंग (ध्वस्त करने वाला) होगा।"
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आगे की राह
यह संकट केवल दो या तीन देशों के बीच का नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आपके बजट पर पड़ने वाला है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) आने वाले हफ्तों में ईंधन के दाम बढ़ाने की तैयारी कर सकती हैं। कूटनीति के इस अंतिम दौर पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं—या तो आने वाले कुछ घंटों में एक ऐतिहासिक शांति समझौता होगा, या फिर मिडिल ईस्ट एक ऐसे विनाशकारी युद्ध में झुलस जाएगा जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना होगा।





