ट्रंप की दोटूक: नेतन्याहू से कहा- 'लेबनान और ईरान पर तुरंत रोकें पलटवार', क्या टल जाएगा तीसरा विश्व युद्ध?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली पीएम नेतन्याहू से ईरान और लेबनान पर जवाबी हमले रोकने को कहा है। जानिए इस बड़े कूटनीतिक मोड़ की पूरी इनसाइड स्टोरी।
महाशक्तियों में खलबली: डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू को फोन कर कहा—'तुरंत रोकें जवाबी कार्रवाई', पश्चिम एशिया में बड़ा कूटनीतिक मोड़
वाशिंगटन/तेल अवीव (अंतरराष्ट्रीय डेस्क - 8 जून, 2026): पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीधे बात कर उन्हें ईरान के मिसाइल हमलों और लेबनान संकट पर किसी भी तरह की बड़ी जवाबी कार्रवाई (Retaliation) को तुरंत रोकने (Halt) के लिए कहा है।
इस कूटनीतिक संदेश के बाद अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसे ट्रंप प्रशासन की ओर से क्षेत्र में एक पूर्ण युद्ध (All-Out War) को टालने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेल संकट से बचाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
1. ट्रंप की 'दोटूक' सलाह: फोन कॉल में क्या बात हुई?
वाशिंगटन के कूटनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री को स्पष्ट शब्दों में वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का हवाला दिया है:
-
वैश्विक मंदी का खतरा: ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने ईरान के तेल ठिकानों या परमाणु संयंत्रों पर बड़ा हमला किया, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी आ जाएगी।
-
अमेरिका का रुख: ट्रंप प्रशासन इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और घरेलू महंगाई को नियंत्रित करने पर ध्यान दे रहा है। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका इस समय किसी नए और लंबे खिंचने वाले युद्ध का सीधा हिस्सा नहीं बनना चाहता।
-
बातचीत का विकल्प: ट्रंप ने नेतन्याहू को सलाह दी है कि सैन्य ताकत के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान को घेरा जाए।
2. लेबनान हमला और ईरान की मिसाइलें: तनाव की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र में हिंसा का एक नया और खतरनाक दौर देखने को मिला है:
-
लेबनान में सैन्य ऑपरेशन: इजरायल द्वारा लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में किए गए हमलों के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी।
-
ईरान का पलटवार: इसके जवाब में ईरान ने इजरायली शहरों को निशाना बनाते हुए सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, इजरायल के 'आयरन डोम' और 'एरो' डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन इस हमले ने इजरायल को बड़े जवाबी हमले के लिए उकसा दिया था।
इजरायल इस बात पर अड़ा हुआ था कि वह ईरान और लेबनान स्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अब तक का सबसे भीषण हमला करेगा, लेकिन ट्रंप के इस दखल ने फिलहाल इजरायली युद्ध कैबिनेट के कदमों को धीमा कर दिया है।
3. नेतन्याहू के सामने धर्मसंकट: क्या मानेंगे ट्रंप की बात?
बेंजामिन नेतन्याहू इस समय एक बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक धर्मसंकट में हैं:
-
घरेलू दबाव: इजरायल के भीतर दक्षिणपंथी नेता और आम जनता ईरान को कड़ा सबक सिखाने की मांग कर रहे हैं।
-
अमेरिकी निर्भरता: इजरायल अपने हथियारों की आपूर्ति, खुफिया जानकारी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सुरक्षा (Veto Power) के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति की इच्छा के खिलाफ जाकर कोई भी बड़ा कदम उठाना इजरायल के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
क्या टल गया है बड़ा खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस हस्तक्षेप से युद्ध पूरी तरह खत्म भले न हो, लेकिन कुछ समय के लिए टल जरूर गया है। यदि इजरायल अमेरिकी सलाह मानकर अपने कदम पीछे खींचता है, तो यह वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों के लिए एक बड़ी राहत होगी। हालांकि, इस पर ईरान की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।





