ब्लड कैंसर को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन,:डॉक्टर बोले- मल्टीपल माइलोमा एक प्रकार का कैंसर
कैंसर के जागरूकता को लेकर लगातार कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वही आज रविवार को ब्लड कैंसर को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम एशिया हॉस्पिटल चलाया गया। इस कार्यक्रम में शामिल डॉक्टर आंकोलॉजिस्ट डॉ कुमार प्रभात ने कहा की मल्टीपल माइलोमा एक प्रकार का रक्त कैंसर है। जो हमारे खून के प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है। हड्डियों में दर्द रहना, कमजोरी, जी मिचलाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह एक प्रकार की क्रोनिक बीमारी है। इसके इलाज में कीमोथेरेपी व इम्यूनोथेरेपी सहायक होता है। विकिरण चिकित्सा और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) की भी जरूरत पड़ती है। डॉ कुमार प्रभात ने बताया कि मल्टीपल माइलोमा के कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं हैं। मगर बढ़ती उम्र के साथ इसका खतरा बढ़ता है। 75% से अधिक मामले 55 से 85 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में यह होता है। इसी उम्र के लोगों में बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसके अलावा वातावरण का प्रभाव, प्रदूषण और आनुवांशिक कारणों से मल्टीपल माइलोमा हो सकता है। सूजन संबंधी शिकायत, डायबिटीज और हृदय रोग वाले मरीजों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। उन्होंने मल्टीपल माइलोमा के लक्षण के बारे में कहा कि हड्डियों में दर्द विशेषकर रीढ़ या छाती से, अत्यधिक थकान व कमजोरी, जी मिचलाना, वजन घटना, पैरों में कमजोरी, मानसिक भ्रम आदि, खून की कमी व किडनी से संबंधित समस्या इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।
कैंसर के जागरूकता को लेकर लगातार कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वही आज रविवार को ब्लड कैंसर को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम एशिया हॉस्पिटल चलाया गया। इस कार्यक्रम में शामिल डॉक्टर आंकोलॉजिस्ट डॉ कुमार प्रभात ने कहा की मल्टीपल माइलोमा एक प्रकार का रक्त कैंसर है। जो हमारे खून के प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है। हड्डियों में दर्द रहना, कमजोरी, जी मिचलाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह एक प्रकार की क्रोनिक बीमारी है। इसके इलाज में कीमोथेरेपी व इम्यूनोथेरेपी सहायक होता है। विकिरण चिकित्सा और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) की भी जरूरत पड़ती है। डॉ कुमार प्रभात ने बताया कि मल्टीपल माइलोमा के कारण पूरी तरह से ज्ञात नहीं हैं।
मगर बढ़ती उम्र के साथ इसका खतरा बढ़ता है। 75% से अधिक मामले 55 से 85 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में यह होता है। इसी उम्र के लोगों में बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है। इसके अलावा वातावरण का प्रभाव, प्रदूषण और आनुवांशिक कारणों से मल्टीपल माइलोमा हो सकता है। सूजन संबंधी शिकायत, डायबिटीज और हृदय रोग वाले मरीजों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। उन्होंने मल्टीपल माइलोमा के लक्षण के बारे में कहा कि हड्डियों में दर्द विशेषकर रीढ़ या छाती से, अत्यधिक थकान व कमजोरी, जी मिचलाना, वजन घटना, पैरों में कमजोरी, मानसिक भ्रम आदि, खून की कमी व किडनी से संबंधित समस्या इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।
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