किसान के बेटे ने 10वीं में टॉप-10 में बनाई जगह:घर में आर्थिक तंगी के बावजूद कड़ी मेहनत से की पढ़ाई
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। 82.91% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। जिसमें मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड चतिरासी उत्क्रमित एम एस हाई स्कूल के छात्र सुशील कुमार ने दसवीं की परीक्षा में टॉप 10 में स्थान हासिल किया है। उन्हें 500 में से 479 नम्बर आए हैं। जिससे परिवार में खुशी की लहर है। बेटे के रिजल्ट की खुशी में माता-पिता ने गली मोहल्ले में मिठाईयां बांटी। सुशील के पिता अनूप राय गांव में किसान हैं। सुशील ने बताया कि इस सफलता के पीछे उनके माता पिता का हाथ है। शुरू से ही कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करते थे। सुबह 4 बजे ही उठकर पढ़ाई करना शुरू कर दिया करते थे।इस तरीके से दिन में 12 से 13 घंटे पढ़ाई किया करते थे। आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहता हूं। मेरे गांव के लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। उनकी इस परेशानी को देखते हुए मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। अनूप राय ने बताया कि सुशील शुरू से पढ़ाई में काफी तेज है। आर्थिक तंगी के कारण कभी-कभी उसे पढ़ाई में कठिनाई का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ छोटे बच्चों को पढ़ा लिखा कर अपनी पढ़ाई जारी रखी। दिन में 12 से 13 घंटा पढ़ाई किया करता था। हम लोगों को बड़ी उम्मीद थी। जिस उम्मीद पर मेरा बेटा खड़ा उतरा।
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। 82.91% स्टूडेंट्स पास हुए हैं। जिसमें मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड चतिरासी उत्क्रमित एम एस हाई स्कूल के छात्र सुशील कुमार ने दसवीं की परीक्षा में टॉप 10 में स्थान हासिल किया है। उन्हें 500 में से 479 नम्बर आए हैं। जिससे परिवार में खुशी की लहर है। बेटे के रिजल्ट की खुशी में माता-पिता ने गली मोहल्ले में मिठाईयां बांटी। सुशील के पिता अनूप राय गांव में किसान हैं। सुशील ने बताया कि इस सफलता के पीछे उनके माता पिता का हाथ है। शुरू से ही कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई करते थे। सुबह 4 बजे ही उठकर पढ़ाई करना शुरू कर दिया करते थे।
इस तरीके से दिन में 12 से 13 घंटे पढ़ाई किया करते थे। आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहता हूं। मेरे गांव के लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। उनकी इस परेशानी को देखते हुए मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। अनूप राय ने बताया कि सुशील शुरू से पढ़ाई में काफी तेज है। आर्थिक तंगी के कारण कभी-कभी उसे पढ़ाई में कठिनाई का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ छोटे बच्चों को पढ़ा लिखा कर अपनी पढ़ाई जारी रखी। दिन में 12 से 13 घंटा पढ़ाई किया करता था। हम लोगों को बड़ी उम्मीद थी। जिस उम्मीद पर मेरा बेटा खड़ा उतरा।
Source:-https://www.bhaskar.com/





