दुनिया में समय से पूर्व आ गई बसंत ऋतु, यूरोप में छंटी बर्फ, जापान मैक्सिको में पहले ही खिल गए फूल

दुनिया में समय से पहले ही वसंत ऋतु का आगमन हो गया है। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसमी चेंजेस आ रहे हैं। वसंत ऋतु का ही प्रभाव है कि जापान से मैक्सिको तक फूल जल्दी खिल गए हैं। यूरोप में जो स्कीइंग करने वाले रिजॉर्ट हैं, वहां बर्फ गायब हो चुकी है।

दुनिया में समय से पूर्व आ गई बसंत ऋतु, यूरोप में छंटी बर्फ, जापान मैक्सिको में पहले ही खिल गए फूल

दुनिया में समय से पहले ही वसंत ऋतु का आगमन हो गया है। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसमी चेंजेस आ रहे हैं। वसंत ऋतु का ही प्रभाव है कि जापान से मैक्सिको तक फूल जल्दी खिल गए हैं। यूरोप में जो स्कीइंग करने वाले रिजॉर्ट हैं, वहां बर्फ गायब हो चुकी है।

वसंत ऋतु का ही प्रभाव है कि जापान से मैक्सिको तक फूल जल्दी खिल गए हैं। यूरोप में जो स्कीइंग करने वाले रिजॉर्ट हैं, वहां बर्फ गायब हो चुकी है। वहीं टेक्सास में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। अमेरिकी ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) अभी आंकड़े जुटा रहा है। हालांकि, शुरुआती रुझान बताते हैं कि यह लगातार नौवां महीना होगा, जब ऐतिहासिक रूप से तापमान रिकॉर्ड स्तर पर टूटने वाला है। एनओएए 14 मार्च फरवरी के अंतिम आंकड़े प्रकाशित करेगा।

एनओएए के वायुमंडलीय वैज्ञानिक कैरिन ग्लीसन ने बताया कि अलनीनो का प्रभाव 2024 के अंत तक खत्म होगा। इसकेबाद दुनिया को गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं। हालांकि इसके बाद तेजी से ला नीनो का प्रभाव बढ़ेगा। ला नीनो अल नीनो का ही विपरीत रूप है। ऐसे में ला नीनो के आगमन से पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में कड़ाके की सर्दी वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है। एनओएए का अनुमान है कि 22 फीसदी संभावना है कि 2024 सबसे गर्म वर्ष के रूप में 2023 का रिकॉर्ड तोड़ देगा। वहीं 99 फीसदी संभावना है कि यह अब तक के 5 सबसे गर्म वर्षों में शामिल होगा।

ग्लीसन ने कहा, इंटरनेट पर उन्होंने जापान, मेक्सिको व यूरोप की तस्वीरें देखी हैं। यहां समय से पूर्व वसंत ने दस्तक दे दी है। अमेरिका में कई जगह तापमान सामान्य से 22 डिग्री सेल्सियस तक अधिक था, टेक्सास के किलेन शहर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि इन दिनों यहां सामान्य तापमान 16 डिग्री होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के भौतिक विज्ञानी एंडर्स लीवरमैन ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ी गर्मी वैश्विक मौसम प्रणालियों पर कहर बरपा रही है। ध्रुवों, पहाड़ों से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र स्तर बढ़ रहा है।